बच्चों के लिए गणित मज़ेदार बनाने के 3 आसान तरीक़े

Posted by Manjiri Shete on Aug 16, 2021 4:04:24 PM
Manjiri Shete

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Child solving Maths

संख्याओं के प्रति चेतना बचपन से ही हमारे अंदर मौजूद होती है।छोटी उम्र से ही बच्चों को यह पता होता है कि ‘ज़्यादा' ही अच्छा होता है। अगर हम उन्हें चॉकलेट के दो बक्से दें तो बच्चे स्वतः ही वह बक्सा चुनेंगे जिसमें ज़्यादा चॉकलेट हैं। अगर कोई चीज़ बच्चों के पहुँच से परे किसी ऊँची जगह पर रखी हुई है, तो उसे लेने के लिए वे स्वतः ही अपने किसी बड़े की सहायता माँगते हैं। अतः एक मोटे तौर पर बच्चों को कम या ज़्यादा ऊँचाई का अंदाज़ा भी होता है। ये उदाहरण बच्चों में संख्याओं के प्रति एक जन्मजात समझ दर्शाते हैं।

संख्याओं की इस जन्मजात समझ के बावजूद भी गणित को हमारे समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग एक कठिन विषय की तरह देखता है। ज़्यादातर बच्चों को गणित एक बोझ की तरह लगता है। ऐसा क्यूँ है?

आत्मविश्वास की कमी, गणित को आसान भाषा में समझने वाली किताबों का अभाव, छोटी उम्र में मार्गदर्शन का अभाव, इत्यादि इसके प्रमुख कारण हैं। शिक्षकों और अभिभावकों के थोड़ा सा सचेतन रहने पर इनका निवारण किया जा सकता है। जितनी छोटी उम्र में बच्चों के लिए ऐसी कोशिशें की जाएँगीं, उतनी ही यह सम्भावना बढ़ेगी कि वे गणित को पसंद करने लगेंगें।

गणित में कुशलता केवल तकनीकी पेशों के लिए ही ज़रूरी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा महत्वपूर्ण कौशल है जिसकी हर किसी को आम ज़िंदगी में भी ज़रूरत पड़ती है। जिन लोगों में गणित का ठीक-ठाक कौशल होता है, उनकी सोच ज़्यादातर मामलों में तर्कसम्मत होती है और इसका उन्हें जीवन के कई पहलुओं में फ़ायदा भी होता है।

क्या आप भी कुछ आसान तरीक़े जानना चाहते हैं जिससे आप अपने बच्चों को गणित में बेहतर बना पाएँ? आइए हम आपको 3 आसान तरीक़े बताते हैं:

1. गणित को रोज़मर्रा के जीवन से जोड़ें:
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अगली बार जब आप घर का सामान ख़रीदने जाएँ, तो बच्चों को साथ ले जाएँ। उन्हें हर सामान के दाम का ध्यान रखने बोलें और हर नया सामान लेने पर मन में ही दाम को जोड़ने बोलें। पूरी खरीददारी के बाद बच्चों से कुल दाम पूछें। सही जवाब देने पर उन्हें कोई छोटा सा इनाम भी दें।

आप घर का दैनिक काम करते हुए भी बच्चों को गणित में बेहतर बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब आप खाना पकाने वाले हों, तब उन्हें विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री लाने बोलें। जैसे 2 प्याज़, 1 कप चावल, ½ कप दाल, 3 कप पानी, इत्यादि। इस खेल को आप और चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं अगर आप उनसे यह भी पूछें कि “अगर ज़्यादा लोगों के लिए खाना बनाना हो, तो ये सामग्री कितनी ज़्यादा लेनी पड़ेगी?” ये छोटे-छोटे खेल हम वयस्कों को बहुत ही आसान लग सकते हैं, लेकिन इससे बच्चों में यह समझ बढ़ेगी कि गणित कोई काल्पनिक विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है।

2. पाठ्य पुस्तकों से ज़्यादा पज़ल गेमों का इस्तेमाल करें:
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(फ़ोटो: पासों और चार्ट पेपर से बना हुआ एक जोड़ सीखने का गेम। इसे आप आसानी से घर पर भी बना सकते हैं)

गणित सिर्फ़ पाठ्य पुस्तकों से सीखने की चीज़ नहीं है। यदि बच्चों के लिए पाठ्य पुस्तक ही एक मात्र ज़रिया है, तो वह काफ़ी नीरस और डरावना विषय भी बन सकता है। इस लिए छोटे-छोटे पज़ल गेम्ज़ से उनको संख्याओं से परिचित कराएँ। पाठ्य पुस्तकों का इस्तेमाल केवल गणित के नियमों को जानने के लिए ही करें। इसके लिए आपको महंगे-महंगे एजुकेशनल गेम्ज़ ख़रीदने की ज़रूरत नहीं है। कई आसान और मनोरंजक गणित के पज़ल गेम्ज़ इंटरनेट पर नि:शुल्क उपलब्ध हैं।

उदाहरण के लिए, यदि आपका बच्चा अंकगणित सीख रहा है, तो आप घर पर ही सिर्फ़ लूडो के पासें और चार्ट पेपर का इस्तेमाल कर के एक छोटा सा गेम बना सकते हैं। नीचे दिए गए चित्र की तरह, चार्ट पेपर पर आयतें (रेक्टैंगल्स) बनाएँ। हर पंक्ति के पहले दो आयतों के बीच जोड़ (+) का निशान लगाएँ, और दूसरे और तीसरे आयतों के बीच बराबर (=) का निशान लगाएँ। अब अपने बच्चों को दो बार पासें फेंकने बोलें। इससे जो संख्याएँ आएँ, उनको पहली पंक्ति के पहले दो आयतों में लिखवाएँ। अब बच्चों को इन संख्याओं का जोड़ करने बोलें, और पंक्ति की तीसरी आयत में लिखने बोलें। ऐसे ही बाक़ी पंक्तियाँ भरवाएँ। आप इस गेम में जोड़ के अलावा घटाव (-) , गुणा (×) या विभाजन (÷) के निशान भी डाल सकते हैं। ऐसे छोटे-छोटे गेम्ज़ से बच्चों के गणित सीखने की प्रक्रिया में आप एक मनोरंजक तत्व भी डाल सकते हैं।

3. स्कूली परीक्षाओं के नतीजों से अत्यधिक परेशान ना हों:

गणित जैसे कठिन समझे जाने वाले विषयों की परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर कई अभिभावक अपने बच्चों को शाबाशी देते हैं और अच्छे अंक न आने पर नाराज़गी भी जताते हैं। यह रणनीति कई बच्चों पर काम करती है मगर यह बच्चों को प्रेरित करने का आदर्श तरीक़ा नहीं है। उन्हें खुले मन से, गणित में जो उनको पसंद आ रहा हो, उसे ढूँढने और पढ़ने दें। अगर वे किसी परीक्षा में बहुत अच्छा नहीं भी करते तो भी उन्हें कोई शॉर्टकट सीखने को मजबूर ना करें। स्कूली परीक्षा के नतीजों से ज़्यादा आगे की ज़िंदगी में गणित से मिली हुई तार्किक क्षमता ही उनके काम आयेगी। बच्चों का यह समझना बहुत ज़रूरी है कि ग़लतियाँ करना, सीखने की प्रक्रिया का एक अनिवार्य अंग है।

निष्कर्ष में, हम यह कह सकते हैं कि हम अपने बच्चों को गणित में उलझने से बचा सकते हैं। सही मार्गदर्शन से हम बच्चों में गणित का डर ख़त्म कर सकते हैं। अभिभावकों और शिक्षकों की कुशल जुगलबंदी से गणित पढ़ना बच्चों के लिए एक सुखद अनुभव हो सकता है।

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Manjiri is a Senior Content Marketing Executive at LEAD School. She loves reading to the point where a good book has made her skip social gatherings that witness her not-so-funny attempts at being funny. She has an inclination towards travelling, fashion, art and eating doughnuts.

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