बच्चों को नयी भाषा सिखाने के पांच आसान तरीके

Posted by Anuj Kumar Jha on Sep 8, 2021 11:19:42 AM
Anuj Kumar Jha

Tags: Parents

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भारत जैसे बहुभाषी देश में लोगों का द्विभाषी होना स्वाभाविक है। पश्चिमी देशों के विपरीत,अधिकतर भारतीय बच्चों को दो भाषाएँ तो सीखनी ही पड़ती है: अपनी मातृभाषा और अंग्रेजी। ऐसा होते हुए भी कई अभिभावक अपने बच्चों को ज्यादा भाषाएँ सिखाने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि ज्यादा भाषाएँ सीखने से बच्चे भ्रांत हो जायेंगे और इसी वजह से वे अपने बच्चों को कोई विदेशी भाषा सीखने की प्रेरणा भी नहीं देते। ऐसे कई मामले देखने को मिलते हैं जहाँ बच्चे अपनी मातृभाषा में लिखना-पढना भी नहीं जानते। यह प्रायः उन बच्चों में नज़र आता है जिनके अभिभावकों को मात्र अंग्रेजी की कुशलता ही महत्वपूर्ण लगती है। इन अभिभावकों को ऐसा लगता है कि स्थानीय भाषाओं में बात करने से या उन्हें पढ़ने से बच्चे अंग्रेजी ढंग से नहीं सीख पाएंगे।

आम धारणा के विपरीत, बहुभाषी होने के अनेकों फायदे हैं। इससे बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ती है, सांस्कृतिक चेतना बढ़ती है और कई मामलों में करियर की संभावनाएं भी बेहतर होती है।

इस लेख में हम आपको बच्चों को एक नयी भाषा सीखाने के पांच आसान तरीके बताएँगे।

कोई भी नयी भाषा सीखाना बचपन से ही शुरू करें:

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हम एक नयी भाषा किसी भी उम्र में सीख सकतें हैं, परन्तु छोटे बच्चे निश्चित तौर पर इसे सबसे तेज़ कर सकते हैं। दो से तीन वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे नयी ध्वनियों के पैटर्न को समझने के लिए सबसे अधिक ग्रहणशील होते हैं और इसी वजह से वे नयी भाषाएँ आसानी से सीख पाते हैं। यदि आपका परिवार बहुभाषी है या आप ऐसे राज्य में रहते हैं जहाँ की स्थानीय भाषा आपकी मातृभाषा से अलग है, तो दो से तीन साल की उम्र सबसे सही समय है अपने बच्चों को नयी भाषाएँ सिखाने का। आप यह न सोचें की बच्चे इससे भ्रांत हो जायेंगे। इस उम्र में बच्चे आसानी से दो भाषाओँ की अलग अलग ध्वनियों का अंतर समझ सकते हैं।

प्रति-व्यक्ति -एक-भाषा मॉडल का इस्तेमाल करें:

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यदि आपके और आपके जीवनसाथी की मातृभाषा अलग हैं, तो आप प्रति-व्यक्ति-एक-भाषा मॉडल का इस्तेमाल करें। उदाहरण के लिए, यदि आपकी मातृभाषा हिंदी है और आपके जीवनसाथी की मातृभाषा गुजराती है, तो आप बच्चे से सिर्फ हिंदी में बात करें और आपके जीवनसाथी को बच्चे से सिर्फ गुजराती में बात करने को बोले। ऐसा संभव है की बच्चा स्कूल में अंग्रेजी जैसी एक तृतीय भाषा भी सीख रहा होगा। यदि आप और आपका जीवनसाथी, दोनों ही अंग्रेजी बोलने में सहज हैं, तो आप सिर्फ स्कूली गृह कार्य करवाते समय ही बच्चे से अंग्रेजी में बात करें।

इंटरनेट पर भाषाओं के नि: शुल्क संसाधन खोजें:

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कुछ समय पहले तक कोई विदेशी भाषा सीखना सामान्य लोगों के बस की बात नहीं थी। लेकिन आज के समय में इंटरनेट पर ढेरों नि: शुल्क संसाधन उपलब्ध हैं। उदहारण के तौर पर, Learn French with Alexa, एक नि: शुल्क YouTube चैनेल है जिससे आप फ़्रांसिसी भाषा सीख सकते हैं। आप मोबाइल पर Duolingo जैसे app भी डाउनलोड कर सकते हैं जिससे भाषाएँ सीखना बहुत ही सरल और मजेदार हो जाता है। यदि आपके बच्चे के स्कूल में कोई विदेशी भाषा सिखाने की व्यवस्था हो तो निश्चित ही इस सुविधा का इस्तेमाल करें। विदेशी भाषा सीखना सिर्फ नयी संस्कृतियों की समझ ही नहीं बढ़ाता बल्कि भविष्य में यह बच्चे के कैरियर में मददगार भी साबित हो सकता है। यह ख़ास कर तब काम आता है जब आपका बच्चा भविष्य में किसी ऐसे देश में अपनी पढाई करना चाहे जो की अंग्रेजी भाषी न हो। विदेशी भाषाओँ की थोड़ी सी भी समझ आपके बच्चे को आज के वैश्वीकृत समाज में बहुत बड़ी बढ़त दे सकती है।

भाषा सीखने की प्रक्रिया को मजेदार बनाएं :

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भाषा की पढ़ाई केवल लेखों, कविताओं और व्याकरण की किताबों तक ही सीमित नहीं है। किसी भी भाषा के चलचित्र या गाने उस भाषा को सिखने की प्रकिया को मज़ेदार बना देते हैं।

उदहारण के तौर पर, यदि आप बच्चे को अंग्रेजी सिखाना चाहते हैं तो हिंदी में डब किया गया कार्टून न दिखाएं, बल्कि अंग्रेजी में ही दिखाएं। यदि बच्चों को शुरू में दिक्कत आये तो अंग्रेजी उपशीर्षकों वाले कार्टून दिखाएँ। धीरे-धीरे आप पाएंगे की बच्चे सही शब्द पकड़ने लगेंगे। आप बच्चों को दो-तीन ऐसे शब्दों की सूचि बनाने भी बोल सकते हैं जो उन्हें उस कार्टून से पता चलें हों। ऐसे छोटे-छोटे उद्देश्यपूर्ण हस्तक्षेपों से आप बच्चों को एक नयी भाषा सिखने में सक्षम बना सकते हैं।

उचित उम्मीदें रखें:

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भाषा सीखना अपने आप में एक यात्रा है। जब आपके बच्चे कई भाषाओं के संपर्क में आयें, तो उनसे यह उम्मीद न करें कि वे उन सभी में धाराप्रवाह होंगे। कभी-कभी वे शब्दों के लिंग में भ्रमित हो सकते हैं या बोलते समय कुछ अन्य भाषा के शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं। जब भी ऐसा होता है, उन्हें त्रुटियों का एहसास करने और उन्हें सुधारने में मदद करें। इन गलतियों को एक सकारात्मक तरीके से समझने में उनकी मदद करें और उन्हें निरंतर सीखते रहने के लिए प्रोत्साहित करें।

बहुभाषी होने के अपने कई फायदे हैं। यह आपके बच्चे को दुनिया के बारे में अधिक जानने का अवसर देने के बराबर है। संसाधनों के साथ उनकी मदद करने के साथ-साथ, उनकी इस भाषा की यात्रा के लिए एक उत्साहजनक वातावरण बनाने का प्रयास करें। भाषा सीखने में रुचि रखने वाले कुछ समुदाय खोजें या खुद ही समान रुचियों वाले बच्चों का समूह बनाएं। इससे बच्चों को इस नयी भाषा में बोलने की क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलेगी। याद रखें कि यह यात्रा हमेशा आसान नहीं होगी और रातों-रात किसी भाषा में निपुणता नहीं आती। एक नयी भाषा सीखने के लिए बच्चों को सबसे ज्यादा आपके मार्गदर्शन और निरंतर समर्थन की आवश्यकता होगी।

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Anuj Kumar Jha
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Anuj Kumar Jha, a Faculty of Management Studies (Delhi) alumnus, is the Program Manager at LEAD. Previously, he has worked with Ex-Ola and Ex-Mu Sigma. Anuj has graduated from HBTI, Kanpur. Knowing the power of education, he believes in LEAD's mission to transform learning in Affordable Private Schools in India.

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